झुंझुनूं-सूरजगढ़ : सूरजगढ़ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि मनाई

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : नीलेश मुदगल 

झुंझुनूं-सूरजगढ़ : मधुकर कॉलेज सूरजगढ़ में जगदेव सिंह खरड़िया के नेतृत्व में किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि मनाई। चौधरी चरण सिंह के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गाँधी ने चौधरी चरण सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा- भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह गांव, गरीब और किसानों की आवाज बुलंद करने वाले प्रखर नेता थे। आजादी के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए किसानों के हित में महत्वपूर्ण फैसले लिये। वह उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार के लिए अग्रणी नेता माने जाते हैं। 1939 में कृषकों के क़र्ज मुक्ति विधेयक को पारित कराने में चौधरी चरण सिंह की निर्णायक भूमिका थी। 1960 में उन्होंने भूमि हदबंदी क़ानून को लागू कराने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। एक जुलाई 1952 को यूपी में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखापाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया।

चौधरी चरण सिंह कांग्रेस सरकार में 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 1977 में मोरारजी देसाई सरकार में देश का गृहमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। सही मायने में चौधरी चरण सिंह गांधीवादी नेता थे। वे चाहे कितने भी बड़े पद पर रहे हों, उनकी सादगी बेमिसाल थी। ऐसे नेताओं की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में फिर से आवश्यकता है। शिक्षाविद् राजपाल सिंह फौगाट ने भी चौधरी चरण सिंह के जीवन संघर्ष के बारे में बताते हुए अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री और संसद में बैठने वाले नेता किसान घाट पर जाकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी जरूरी नहीं समझते हैं। सत्य को दबाया जा रहा है। गरीबों और किसानों का शोषण किया जा रहा है। अन्याय अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों की आवाज दबाई जा रही है। संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। ऐसे में हमें सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है।

इस मौके पर मोतीलाल डिग्रवाल, मास्टर रामस्वरूप सिंह आसलवासिया, ओमप्रकाश सेवदा, डॉ. एस आर प्रेमी, हुकमसिंह झाझड़िया, राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंकित धायल, संदीप भड़िया जीणी, धर्मपाल गांधी, जगदेव सिंह खरड़िया, राजपाल सिंह फौगाट, राजेश दूधवाल, लीलाधर मेघवाल, यश झाझड़िया, प्रताप सिंह गरसा, विजेंद्र शास्त्री पहलवान आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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