जयपुर : राज्य में सियासी फायदे के कारण तबादलों की बेला बेलगाम हो गई है। सरकार ने विधायकों को खुश करने के लिए तबादले खोल तो रखे हैं, लेकिन इसका दुष्प्रभाव नजर आने लगा है। सबसे बड़े महकमे शिक्षा विभाग की बात करें तो ढाई लाख शिक्षक अध्यापन को छोड़ बचने और लगने में ही व्यस्त हैं। इसका असर सरकारी स्कूलों में पड़ रहा है। अक्टूबर तक तबादले खुले रहने के कारण स्कूलों में शिक्षक स्थिर नहीं हो पा रहे हैं।
इस तरह से हो रहे तबादले
- कमल सिंह शेखावत प्रधानाध्यापक का तबादला पहले राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय शिम्भुपुरा गोविंदगढ़ से वरिष्ठ अध्यापक राउमावि चरण नदी स्कूल कर दिया। बाद में वापस शिम्भुपुरा लगा दिया।
- वरिष्ठ अध्यापक पुष्पेंद्र सिंह का तबादला राउमावि विद्याधर नगर से कठूमर अलवर कर दिया। यहां से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जैतपुरा चौमूं और फिर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जैतपुरा चौमूं से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय तिगरिया गोविंदगढ़ कर दिया।
- प्रधानाध्यापक यशपाल सिंह चौधरी का तबादला राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ढाणी रामबाग से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांभर ब्लॉक में किया। इसके बाद राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चोरू फागी और अब राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मुरलीपुरा स्कीम में किया गया।
जनप्रतिनिधियों की सिफारिश में भी उलटफेर
शिक्षक संगठन बोले: बंद हों तबादले
ऐसा पहली बार ही हो रहा है कि अक्टूबर तक तबादले चल रहे हैं। इससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को शिक्षा विभाग में तबादले बंद कर देने चाहिए।
अंजनी कुमार शर्मा, प्रदेश मंत्री, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
जनप्रतिनिधियों की सिफारिश के बाद किए गए ट्रांसफर में भी उलटफेर किए जा रहे हैं। एक ही शिक्षक के दो-दो बार तबादले हो रहे हैं। तबादलों से शिक्षक स्थिर नहीं हो रहे हैं। विभाग अब रोक लगाए।